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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने 8 जून 2026 को अपनी वार्षिक सिपरी ईयरबुक 2026 जारी की, जो हथियारों, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद रिपोर्ट मानी जाती है। यह रिपोर्ट सिपरी की स्थापना के 60वें वर्ष में आई है और इसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
इस साल की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है: दुनिया परमाणु निरस्त्रीकरण से दूर जाकर एक बार फिर परमाणु हथियारों को “राष्ट्रीय शक्ति के औज़ार” के रूप में देखने लगी है — और इसके साथ ही गलत आकलन (miscalculation) और टकराव बढ़ने का खतरा भी।
Table of contents
- सिपरी क्या है?
- वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
- भारत की स्थिति: 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्चकर्ता
- भारत परमाणु हथियारों के मामले में भी आगे बढ़ा
- दुनिया भर में परमाणु हथियार: निरस्त्रीकरण की उम्मीदें कमज़ोर
- ऑपरेशन सिंदूर: भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का ज़िक्र
- भारत हथियार आयात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश
- AI और स्वायत्त हथियार प्रणाली का बढ़ता इस्तेमाल
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सिपरी क्या है?
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) स्वीडन का एक स्वतंत्र शोध संस्थान है, जिसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह सैन्य खर्च, हथियारों के व्यापार, परमाणु शस्त्रागार और सशस्त्र संघर्षों पर आंकड़े जुटाने वाला दुनिया का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। सिपरी ईयरबुक पहली बार 1969 में प्रकाशित हुई थी और तब से हर साल सरकारों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए एक संदर्भ-ग्रंथ की तरह इस्तेमाल होती है।
वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर करीब $2.9 ट्रिलियन (लगभग 2,887 अरब डॉलर) हो गया — यह लगातार 11वें साल वृद्धि है और वैश्विक GDP का 2.5% है। यह सिपरी के रिकॉर्ड में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
टॉप 5 सैन्य खर्च करने वाले देश (2025):
- अमेरिका — $954 अरब (2024 से 7.5% कम, फिर भी दुनिया के कुल खर्च का 33%)
- चीन — $336 अरब (लगातार 31वें साल बढ़ोतरी — सिपरी के डेटाबेस में किसी भी देश की सबसे लंबी स्ट्रीक)
- रूस — तीसरे स्थान पर
- जर्मनी — खर्च में 24% की भारी बढ़ोतरी के साथ ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर पहुंचा
- भारत — $92.1 अरब, ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए 5वें स्थान पर
टॉप 5 देशों का सम्मिलित खर्च $1,686 अरब है, जो वैश्विक कुल खर्च का 58% है। यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के असर से सैन्य खर्च में 14% की बढ़ोतरी हुई, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह बढ़ोतरी 8.1% रही — जो पिछले एक दशक में सबसे तेज़ है।
भारत की स्थिति: 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्चकर्ता
सिपरी रिपोर्ट के मुताबिक भारत का रक्षा खर्च 2025 में 8.9% बढ़कर $92.1 अरब हो गया, जिससे भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्चकर्ता बन गया (2024 में भारत छठे स्थान पर था)। यह वैश्विक सैन्य खर्च का 3.2% है।
भारत सरकार के बजट आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया, जिसमें से ₹2.19 लाख करोड़ नई तकनीक की खरीद के लिए कैपिटल आउटले के तौर पर रखे गए हैं। यह बढ़ोतरी “आत्मनिर्भर भारत” और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के साथ-साथ हो रही है।
भारत परमाणु हथियारों के मामले में भी आगे बढ़ा
सिपरी के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 12 हथियार पहली बार ऑपरेशनल रूप से तैनात (deployed) बताए गए हैं और 178 भंडार/स्टोरेज में हैं। तुलना के लिए:
- चीन: करीब 620 परमाणु हथियार
- भारत: करीब 190 परमाणु हथियार
- पाकिस्तान: करीब 170 परमाणु हथियार
भारत का परमाणु आधुनिकीकरण अब लंबी दूरी की मिसाइलों पर केंद्रित है, खासकर चीन के मुकाबले एक भरोसेमंद डेटरेंस बनाने के लिए, जबकि पाकिस्तान के साथ रणनीतिक संतुलन भी बनाए रखा जा रहा है। भारत ज़मीन, वायु और समुद्र-आधारित — तीनों तरह के परमाणु डिलीवरी सिस्टम पर काम कर रहा है ताकि भरोसेमंद “सेकेंड-स्ट्राइक” क्षमता सुनिश्चित हो सके।
दुनिया भर में परमाणु हथियार: निरस्त्रीकरण की उम्मीदें कमज़ोर
रिपोर्ट के सबसे चिंताजनक निष्कर्षों में से एक यह है कि 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ परमाणु-संपन्न देशों — अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल — के पास सम्मिलित रूप से करीब 12,187 परमाणु हथियार थे, जिनमें से 9,745 हथियार सैन्य भंडार में और संभावित रूप से ऑपरेशनल रूप से उपलब्ध माने गए।
कुल वैश्विक भंडार में मामूली गिरावट सिर्फ इसलिए दिख रही है क्योंकि अमेरिका और रूस शीत-युद्ध युग के पुराने हथियार नष्ट कर रहे हैं — लेकिन सभी नौ देश साथ-साथ नए, आधुनिक हथियार भी शामिल कर रहे हैं, जिससे यह गिरावट धीमी हो गई है।
परमाणु नियंत्रण ढांचा भी कमज़ोर पड़ता दिख रहा है:
- न्यू स्टार्ट संधि फरवरी 2026 में बिना किसी नई संधि के समाप्त हो गई
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की 2026 रिव्यू कॉन्फ्रेंस 22 मई को बिना किसी अंतिम दस्तावेज़ के समाप्त हुई — लगातार तीसरी बार ऐसा हुआ
- जून 2025 में अमेरिका और इज़राइल के ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमलों ने IAEA की निरंतर निगरानी को खत्म कर दिया, जिससे अप्रसार व्यवस्था और कमज़ोर हुई
- 2025 में कुछ यूरोपीय देशों, जिनमें जर्मनी शामिल है, ने अमेरिकी हथियारों पर आधारित नाटो परमाणु-साझेदारी व्यवस्था के अलावा फ्रांस और ब्रिटेन के साथ भी समान व्यवस्था बनाने की इच्छा जताई
ऑपरेशन सिंदूर: भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का ज़िक्र
सिपरी ईयरबुक 2026 में मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव — जिसे भारत में “ऑपरेशन सिंदूर” के नाम से जाना जाता है — को दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच “असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट” बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पाकिस्तानी वायु और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया, जिनमें से कुछ की परमाणु-संबंधी भूमिका हो सकती है — लेकिन दोनों पक्षों ने पूर्ण युद्ध से बचने के लिए कदम उठाए, जो यह दिखाता है कि परमाणु डेटरेंस ने स्थिरता बनाने में भूमिका निभाई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यह संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच सक्रिय सैन्य टकराव में साइबर ऑपरेशन के एकीकरण का पहला ज्ञात उदाहरण था — यानी आधुनिक युद्ध अब सिर्फ परंपरागत मोर्चे तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल क्षेत्र में भी फैल चुका है।
भारत हथियार आयात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश
रक्षा खर्च बढ़ाने के साथ-साथ भारत अब भी विदेशी हथियारों पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। सिपरी की अलग रिपोर्ट (International Arms Transfers) के मुताबिक 2021-25 के दौरान भारत वैश्विक हथियार आयात का 8.2% हिस्सा लेकर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा — सिर्फ यूक्रेन इससे आगे रहा।
इस अवधि के टॉप 5 हथियार-आयातक देश थे: यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान — जो मिलकर दुनिया के कुल हथियार आयात का 35% हिस्सा बनते हैं।
रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है, लेकिन भारत धीरे-धीरे अपनी खरीद को विविध बना रहा है — फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान, इज़राइल से हेरॉन ड्रोन, और अमेरिका से MQ-9B ड्रोन जैसी खरीद के ज़रिए। इसके साथ ही “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के तहत कुछ हथियारों के आयात पर पाबंदी लगाकर स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
AI और स्वायत्त हथियार प्रणाली का बढ़ता इस्तेमाल
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण रुझान सामने आया है — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टारगेटिंग और स्वायत्त हथियार प्रणालियां अब गाजा और यूक्रेन जैसे सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों में नियमित रूप से इस्तेमाल हो रही हैं। साथ ही, अमेरिका ने जुलाई 2025 में अपनी राष्ट्रीय AI एक्शन प्लान घोषित की, जबकि चीन ने इसी महीने वैश्विक AI गवर्नेंस के लिए 13-सूत्री रोडमैप पेश किया — यह दिखाता है कि तकनीकी वर्चस्व अब परंपरागत सैन्य ताकत जितना ही महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
सिपरी ईयरबुक 2026 साफ संकेत देती है: दुनिया एक अधिक अस्थिर, अधिक हथियारबंद और कम सहमति वाले दौर में प्रवेश कर रही है। वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड स्तर पर है, परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा पलट रही है, और भारत खुद को इस बदलते सुरक्षा परिदृश्य में एक प्रमुख सैन्य व परमाणु शक्ति के रूप में मज़बूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में भारत की चुनौती यही रहेगी — रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाना, वो भी ऐसे समय में जब क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव दोनों बढ़ रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Ans: सिपरी ईयरबुक 2026, 8 जून 2026 को स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी की गई।
Ans: भारत 2025 में $92.1 अरब के खर्च के साथ दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्चकर्ता देश बन गया, जो 2024 में 6वें स्थान पर था।
Ans: सिपरी के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 और चीन के पास करीब 620 हैं।
Ans: 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड $2.9 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जो दुनिया की GDP का 2.5% है और लगातार 11वें साल की बढ़ोतरी है।
Ans: सिपरी के मुताबिक 2021-25 के दौरान भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा, जो वैश्विक हथियार आयात का 8.2% हिस्सा है। केवल यूक्रेन इससे आगे रहा।
Ans: रिपोर्ट मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच “असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट” बताती है, जिसमें साइबर ऑपरेशन भी पहली बार सक्रिय संघर्ष में शामिल हुए।
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